न्यायालय के डंडे का असर,डेहरी सिंचाई प्रमंडल ने कोर्ट में जमा किए 28.16 लाख रुपए
मोहनिया सिविल कोर्ट के आदेश के बाद विभाग ने राशि की जमा,कानूनी प्रक्रिया का पालन
मोहनिया व्यवहार न्यायालय के सिविल जज (सीनियर डिवीजन)-1 डॉ.आलोक रंजन की अदालत में लंबे समय से लंबित निष्पादन वाद संख्या 13/2021 (रजिस्ट्रेशन संख्या 30/2022) में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। यह मामला मेसर्स शिवशंकर कंस्ट्रक्शन कंपनी प्रा. लि. बनाम बिहार सरकार एवं अन्य से संबंधित है।
कंपनी के डायरेक्टर बिजेंद्र सिंह ने जानकारी देते हुए रविवार को बताया कि सन् 1992 में मेरी कंपनी मेसर्स शिव शंकर कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड जो बहुआरा बैराज कम बियर का निर्माण कार्य किया था जिसका 28लाख भुगतान जल संसाधन विभाग मोहनिया के कार्यालय पर रह गया था।
न्यायालय ने 21 मई 2026 को पारित आदेश में बिहार सरकार की ओर से प्रस्तुत आवेदन पर विचार करते हुए मूल डिक्री राशि 28,16,033 रुपये जमा करने के लिए 20 दिनों का अतिरिक्त समय दिया था। साथ ही न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि इस अवधि में राशि जमा नहीं होने पर पूर्व में जारी कुर्की एवं नीलामी की कार्रवाई पुनः प्रभावी कर दी जाएगी।
अदालत के समक्ष राज्य सरकार की ओर से बताया गया था कि प्रशासनिक स्तर पर राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं डिक्रीधारक की सहमति के बाद न्यायालय ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए समय विस्तार प्रदान किया और ब्याज की राशि का अलग से मिलान कर समझौते के आधार पर भुगतान करने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने यह भी आदेश दिया था कि 8,01,800 रुपये की स्वीकृत राशि पर 9 सितंबर 1997 से 16 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की गणना दोनों पक्ष प्रस्तुत करेंगे,ताकि ब्याज संबंधी विवाद का निपटारा किया जा सके। साथ ही पूर्व में जारी कुर्की एवं नीलामी की कार्रवाई को अगली सुनवाई तक स्थगित रखा गया।
इसी क्रम में सिंचाई प्रमंडल, डिहरी के कार्यपालक अभियंता ने न्यायालय में पत्र देकर जानकारी दी है कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन में 28,16,033 रुपये का बैंक ड्राफ्ट भारतीय स्टेट बैंक के माध्यम से तैयार कर न्यायालय के नाजिर में 18 जुलाई 2026 को जमा करा दिया गया है।
अब अगली सुनवाई में न्यायालय जमा की गई राशि के सत्यापन,ब्याज की गणना तथा शेष ब्याज भुगतान संबंधी समझौते पर विचार करते हुए आगे की कार्रवाई करेगा।
इसकी जानकारी मेसर्स शिव शंकर कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के अधिवक्ता प्रमोद कुमार पाण्डेय ने दिया।


