ANJANI KUMAR
अरवल
ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी गैस सिलेंडर की रिफिलिंग के लिए 45 दिनों की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि अब आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनती जा रही है। समय पर गैस नहीं मिलने से हजारों परिवारों के सामने रोजमर्रा का भोजन तैयार करने तक की समस्या उत्पन्न हो रही है। खासकर उन परिवारों की मुश्किलें अधिक बढ़ गई हैं, जिनके पास केवल एक ही गैस सिलेंडर है और जिनका पूरा रसोईघर एलपीजी पर निर्भर है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की उज्ज्वला योजना और अन्य योजनाओं के बाद गांवों में भी अधिकांश परिवार लकड़ी और उपले छोड़कर गैस चूल्हे का उपयोग करने लगे हैं। ऐसे में सिलेंडर खत्म होने के बाद 45 दिन पूरे होने तक इंतजार करना उनके लिए बेहद कठिन हो जाता है। मजबूरी में कई परिवारों को फिर से लकड़ी और अन्य पारंपरिक ईंधनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे महिलाओं को धुएं और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।उपभोक्ताओं का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में गैस रिफिलिंग के लिए लगभग 25 दिनों का अंतराल लागू है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन की बाध्यता बनी हुई है। इससे ग्रामीण उपभोक्ताओं में असमानता की भावना भी पैदा हो रही है। लोगों का कहना है कि जब गैस की आपूर्ति सामान्य हो चुकी है, तब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग व्यवस्था बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं रह गया है।जानकारी के अनुसार, यह व्यवस्था उस समय लागू की गई थी जब खाड़ी देशों में उत्पन्न परिस्थितियों के कारण एलपीजी आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका थी। गैस की कमी से बचने और सभी उपभोक्ताओं तक समान रूप से सिलेंडर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार ने रिफिलिंग के बीच न्यूनतम 45 दिनों का अंतर निर्धारित किया था। अब जबकि आपूर्ति सामान्य हो चुकी है, लोग इस व्यवस्था को समाप्त करने या इसमें संशोधन की मांग कर रहे हैं।इस संबंध में पूछे जाने पर अरवल के अनुमंडल पदाधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि, “पूर्व में गैस की कमी की आशंका को देखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई थी। वर्तमान में स्थिति सामान्य है। संभव है कि सरकार 45 दिनों की इस शर्त में संशोधन करे। फिलहाल इस संबंध में कोई नया निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है।”
ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि गैस रिफिलिंग की अवधि को शहरी क्षेत्रों के समान किया जाए, ताकि गांवों के लोगों को भी समय पर गैस उपलब्ध हो सके और उन्हें अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।


