कोयल भूपत में भागवत कथा के छठे दिन श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और कंस वध का हुआ भावपूर्ण वर्णन।
अंजनी कुमार
अरवल
अरवल जिले के कलेर प्रखंड के कोयल भूपत गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर रहे। कथा व्यास स्वामी रामायणाचार्य वेदांती जी महाराज ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजा तथा कंस वध की कथा का भावपूर्ण और संगीतात्मक शैली में वर्णन किया। उन्होंने कहा कि पाप कुछ समय के लिए फलता-फूलता अवश्य है लेकिन उसका अंत निश्चित होता है तथा प्रत्येक मनुष्य को अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है।
स्वामी जी ने बताया कि जब इंद्र ने अहंकारवश ब्रजवासियों पर मूसलाधार वर्षा की तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सात दिनों तक सभी ब्रजवासियों, गौधन और ग्वाल-बालों की रक्षा की। इसी घटना के बाद से गोवर्धन पूजा और अन्नकूट की परंपरा प्रारंभ हुई। उन्होंने गोवर्धन पूजा की कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान ने स्वयं विराट गोवर्धन रूप धारण कर भक्तों का समर्पित प्रसाद ग्रहण किया और बाद में सभी के घरों में उससे दोगुना प्रसाद पहुंचाकर अपनी दिव्य लीला का परिचय दिया।
कथा के दौरान “छोटी-छोटी गैया, छोटे-छोटे ग्वाल, छोटे से मेरो मदन गोपाल” भजन की प्रस्तुति पर पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु तालियों की गड़गड़ाहट के बीच भजनों पर झूमते रहे।
स्वामी रामायणाचार्य ने कंस वध प्रसंग का भी अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि अत्याचारी कंस ने श्रीकृष्ण को मारने के लिए नामी पहलवानों को बुलाया, लेकिन मात्र 11 वर्ष की आयु में भगवान श्रीकृष्ण ने सभी पहलवानों को परास्त कर अंततः कंस का वध कर धर्म की स्थापना की। उन्होंने कहा कि भगवान सदैव अधर्म और अहंकार का अंत कर धर्म की रक्षा करते हैं।
कथा के दौरान मगही लोकगायक मनीष शर्मा द्वारा प्रस्तुत भजनों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य यजमान शिव विनोद शर्मा उर्फ शिवजी शर्मा, बसंत शर्मा, पुनुष शर्मा, रजनीमोहन शर्मा, वैद्यनाथ शर्मा, योगेंद्र शर्मा, रामबचन शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


