सामूहिक अवकाश लेकर शिक्षकों ने जताया विरोध, सरकार से अधिनियम पर पुनर्विचार की मांग
अंजनी कुमार
अरवल
बिहार सरकार के प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 के विरोध में सोमवार को राज्यभर के विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मी एकदिवसीय सामूहिक अवकाश पर रहे। विभिन्न शिक्षक एवं कर्मचारी संगठनों के संयुक्त आह्वान पर आयोजित इस सामूहिक आंदोलन का असर कलेर स्थित एस. डी. कॉलेज में भी देखने को मिला। कॉलेज के प्रगतिशील शिक्षक संघ से जुड़े सभी शिक्षकों ने सामूहिक अवकाश में शामिल होकर प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रति अपनी आपत्ति एवं विरोध दर्ज कराया।
बताया गया कि फुटाब, फुस्टाब, बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ तथा बिहार राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के संयुक्त आह्वान पर 10 अगस्त को राज्य के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मियों ने सामूहिक अवकाश पर रहने का निर्णय लिया था। इसी निर्णय के आलोक में एस. डी. कॉलेज कलेर के प्रगतिशील शिक्षक संघ ने भी अपने सभी शिक्षकों को सामूहिक अवकाश में शामिल होने का निर्णय लिया।प्रगतिशील शिक्षक संघ की आमसभा में इस संबंध में पूर्व में निर्णय लिया गया था। आमसभा में लिए गए निर्णय के अनुसार शिक्षकों ने सोमवार को अपने शैक्षणिक कार्यों से सामूहिक रूप से अलग रहकर आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। शिक्षकों ने कहा कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 उच्च शिक्षा व्यवस्था से सीधे तौर पर जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में अधिनियम को लेकर शिक्षक एवं कर्मचारी संगठनों की ओर से उठाई जा रही आपत्तियों और चिंताओं पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
शिक्षकों ने कहा कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय केवल शिक्षण संस्थान नहीं हैं, बल्कि राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। यहां कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मियों की सेवा शर्तों, शैक्षणिक स्वतंत्रता, विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली तथा संस्थानों की स्वायत्तता से जुड़े विषयों का सीधा प्रभाव शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है। इसलिए विश्वविद्यालय से संबंधित किसी भी नए कानून या अधिनियम को लागू करने से पहले उससे जुड़े सभी पक्षों के साथ व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया जाना आवश्यक है।शिक्षक संगठनों का कहना है कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 को लेकर कई बिंदुओं पर शिक्षकों एवं कर्मचारियों में असंतोष है। इसी को लेकर राज्य एवं केंद्रीय स्तर के शिक्षक संगठनों ने संयुक्त रूप से आंदोलन का निर्णय लिया। सोमवार का सामूहिक अवकाश भी इसी आंदोलन की एक कड़ी माना जा रहा है। एस. डी. कॉलेज कलेर के शिक्षकों ने कहा कि सामूहिक अवकाश के माध्यम से सरकार तक यह संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया है कि शिक्षक समुदाय अपनी समस्याओं और अधिकारों को लेकर गंभीर है तथा उनकी मांगों और आपत्तियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
कॉलेज के प्रगतिशील शिक्षक संघ से जुड़े शिक्षकों ने आंदोलन के दौरान एकजुटता प्रदर्शित करते हुए कहा कि शिक्षक संगठनों के संयुक्त निर्णय के प्रति वे पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। शिक्षकों ने सरकार से मांग की कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 को जल्दबाजी में लागू करने के बजाय इसके सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाए। साथ ही शिक्षक एवं कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता कर उनकी आपत्तियों का समाधान किया जाए।शिक्षकों का कहना था कि किसी भी शिक्षा नीति या विश्वविद्यालय संबंधी कानून का अंतिम उद्देश्य उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, विद्यार्थियों के हितों की रक्षा तथा शिक्षण संस्थानों को मजबूत बनाना होना चाहिए। इसके लिए शिक्षकों, कर्मचारियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। शिक्षक संगठनों को उम्मीद है कि सरकार उनके सामूहिक विरोध को गंभीरता से लेते हुए बातचीत का रास्ता अपनाएगी।बताया गया कि राज्य स्तर पर शिक्षक एवं कर्मचारी संगठनों द्वारा लिए गए निर्णय के तहत यह सामूहिक अवकाश आयोजित किया गया। एस. डी. कॉलेज कलेर में भी शिक्षकों ने संगठन के निर्णय का पालन करते हुए इसमें सहभागिता की। शिक्षकों की इस सहभागिता से यह स्पष्ट हुआ कि प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 को लेकर शिक्षक समुदाय में व्यापक स्तर पर चर्चा और चिंता बनी हुई है।शिक्षकों ने कहा कि उनका आंदोलन विद्यार्थियों के हितों के खिलाफ नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और मजबूत बनाने के उद्देश्य से अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के समक्ष रखने का प्रयास है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि शिक्षक संगठनों की मांगों और सुझावों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित अधिनियम पर पुनर्विचार किया जाए।
एस. डी. कॉलेज कलेर के प्रगतिशील शिक्षक संघ ने केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय शिक्षक संगठनों के संयुक्त निर्णय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि आगे भी संगठन के स्तर पर लिए जाने वाले निर्णय के अनुसार शिक्षक अपनी सहभागिता सुनिश्चित करेंगे। सामूहिक अवकाश के माध्यम से शिक्षकों ने सरकार को अपनी नाराजगी एवं आपत्ति से अवगत कराते हुए प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 पर व्यापक चर्चा और पुनर्विचार की मांग उठाई।


