
सियासी सुनामी:विरोध की आंधी में उखड़ गए वफादारी के खंभे,थमाया इस्तीफा
सत्ता का खेल विरोध के आधी में अपनों का साथ छूटा वफादारी का अंत: नेताओं का बड़ा फैसला सियासी बगावत अपनों ने ही थमाया इस्तीफे का परवाना
यूजीसी के जातिगत नियमों का जहर,स्वर्ण एकता का होगा कत्ल
कैमूर। कैंपस में भेदभाव के नाम पर स्वर्ण को अपराधी बनाना भाजपा के कट्टर वोट बैंक का मोहभंग,यूजीसी और आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा में बढ़ी नाराजगी,दो नेताओं में से एक नेता हफ्ता दिन पहले तो एक ने आज छोड़ी पार्टी।
पूर्व जिला उपाध्यक्ष अजय शंकर पाण्डेय ऊर्फ (करीमन बाबा) ने प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा, इस इस्तीफा से एक हफ्ता पहले एक यूथ नेता सूरज तिवारी ने भी पहले ही छोड़ चुका हैं भाजपा दामन।
यूजीसी और आरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर अब खुलकर सामने आने लगे हैं। कैमूर में भाजपा के दो नेताओं के पार्टी छोड़ने से स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ कार्यकर्ता अजय शंकर पाण्डेय (करीमन बाबा) ने शुक्रवार को पार्टी के पद और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
वहीं,मोहनिया प्रखंड बीस सूत्रीय समिति के सदस्य रहे सूरज तिवारी भी इससे पहले भाजपा से इस्तीफा दे चुके हैं।
अजय शंकर पाण्डेय ने 4 सितंबर 2026 को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को अपना त्याग-पत्र भेजा है। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि वह पिछले 21 वर्षों से भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में पार्टी से जुड़े रहे हैं।
वर्तमान मे श्री पाण्डेय ने परिस्थितियों में आरक्षण एवं यूजीसी से संबंधित नीतियों को लेकर असहमति जताते हुए कहा कि इन नीतियों के कारण उन्हें पार्टी के भीतर घुटन महसूस हो रही थी।
यही नहीं श्री पाण्डेय ने आरोप लगाया कि आरक्षण और यूजीसी से जुड़े मामलों में सर्व समाज को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाजहित को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पार्टी और अपने पद से अलग होने का निर्णय लिया है।
उन्होंने स्वयं को अब स्वतंत्र समाजसेवी बताते हुए भविष्य में भी समाजहित में कार्य करते रहने की बात कही है।
इधर,सूरज तिवारी के पहले ही पार्टी छोड़ने और अब अजय शंकर पाण्डेय के इस्तीफे के बाद यूजीसी और आरक्षण के मुद्दे पर सवर्ण समाज के एक वर्ग की नाराजगी भाजपा के भीतर भी दिखाई देने लगी है। दोनों नेताओं के इस्तीफे को कैमूर की स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
बता दे की अजय शंकर पाण्डेय कैमूर जिला मुख्यालय से महज 8 किलोमीटर के दूरी पर स्थित भगवानपुर सदर प्रखंड स्थित भगवानपुर गांव के निवासी हैं।
अजय शंकर पाण्डेय भाजपा कैमूर में जिला उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। अब देखना यह होगा कि दोनों नेताओं के पार्टी से अलग होने के बाद भाजपा संगठन और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है। यह तो आने वाले समय ही बता पाएगा।
वैसे अगर अजय शंकर पाण्डेय का राजनीतिक विरासत देखा जाए तो सदियों से परंपरागत राजनीतिक तथा समाजसेवी विरासत कहां जाए तो कोई गुरेज नहीं।
वहीं दर्जनों की संख्या में युवा नौजवान उपस्थित भाजपा से जुड़े लोगों ने नाम नहीं छापने के शर्त पर अपनी मीडिया से बात जाहिर करते हुए कहा कि अजय शंकर पाण्डेय का भाजपा से जाना वह दिन दूर नहीं जो दसको पहले भाजपा थी वही फिर स्थिति बन जाएगा आने वाला समय में।


